Importance And Duas Of Three Stages Of Ramadan by Imagistaan

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Ramadan the month of fasting : मुसलिम समुदाय द्वारा मनाया जानेवाला सबसे पवित्र पर्व है। यह पर्व पूरे एक माह मनाया जाता है। Islamic Calendar के अनुसार नवा महीना रमजान का होता है। इस पूरे माह में अल्लाह के लिए रोजा रखा जाता है, उनके लिए इबादत की जाती है। जिसके फलस्वरूप अल्लाह ताला सारे गुनाहो क माफ कर देते है।

Importance And Duas Of Three Stages Of Ramadan
Importance of Ramadan Dua & Wishes

मुस्लिमों के लिए क्यों खास है Ramadan: क्योंकि इसी माह के 27वे तारीख को कुरान नाजील हुई थी। अथवा इसे कुरान शरीफ के जश्न के रूप में भी मनाया जाता है। इस पूरे महीने में कुरान की तिलावत (कुरान पढ़ना) की जाती है।

Ramadan Rule? रोजा रखने के तरीके

Ramadan fasting: सिर्फ भूखा रहना ही रोजा नहीं है बल्कि रोजे के दौरान अपने नब्ज पे काबू रखने का नाम ही रोजा है। यानी हमें रोजमर्रा के सारे बूरे आदतों को छोड़कर अल्लाह के इबादत में लगाना पड़ता है। Mah-e-Ramzan और सब महिनों से बिल्कुल अलग है। इन दिनों हर एक चीज का समय और तरीका मुकर्रर की हुई होती है। जैसे,

Sehri: आमदिनों में ऐसा बिल्कुल नहीं होता है कि हम मध्य-रात्रि में नींद से जागकर खाते हैं। पर Sehri Ramadan का एक अहम हिस्सा है जिसमें आधे रात को नींद से जागकर Sehri करना होता है और Roze ki Niyat करनी पड़ती है। इसके बिना हम रोजा नहीं रख सकते। Shehri Time-Table पहले से ही मुकर्रर की हुई होती है।

Sehri ki Niyat ki Dua:

Importance And Duas Of Three Stages Of Ramadan
Roza Rakhne, Sehri ki niyat ki dua

मध्य रात्रि में यानी Fazar ki Namaz के करीब-करीब का समय सेहरी के लिए तय की जाती है। सेहरी करने के कुछ देर बाद ही Fazar ki Azaan हो जाती है जिसके बाद फजर की नमाज अदा की जाती है। फिर दिनभर अपने रोजमर्रा के कामों को भी करना पड़ता है, साथ-साथ समय निकालकर नमाज, कुरान की तिलावत भी की जाती है। फिर वक्त होता है अफतार का।

अफतार: Iftar time table लगभग सारे जगहों के अलग-अलग होती है। जो वहाँ के मुख्य मरकज द्वारा तय किया जाता है। Iftar की तैयारी घर की महिलायें करती है। दिन भर रोजे रखकर घर की महिलायें इस काम को अंजाम देती हैं। अपने अपने हैसियत के हिसाब से Iftar Recipe तैयार की जाती है। इफतार में तरह-तरह के व्यंजन बनाये जाते हैं। अंत में जब समय होता है तो लोग मस्जिदों के आज़ान सुनकर रोजा खोलते हैं।

नबी ए पाक खजूर से रोजा खोलते थे। इसलिये सारे मुस्लिम समुदाय खजुर से ही रोजा खोलने की शुरुआत करते हैं, उसके बाद अन्य व्यंजनों को खाया जाता है। आजान होते ही Iftar खोलने की Dua पढ़ी जाती है, और परिवार के लोग साथ बैठकर अपने घरों में खुशहाली की दुआ मांगते हैं और अफतार करते हैं।

Iftar खोलने ki Dua:

Importance And Duas Of Three Stages Of Ramadan
Roza kholne ki niyat, dua

अफतार के फौरन बाद मगरीब की नमाज अदा की जाती हैं। और फिर देर बाद एशा की नमाज का वक्त होता है। एशा के नमाज के बाद तरावीह की नमाज अदा की जाती हैं।

Taraweeh ki Dua :

Importance And Duas Of Three Stages Of Ramadan
Taraweeh ki dua

Taraweeh ki Namaaz and its Importance:

तरावीह शब्द arabic भाषा का शब्द तरवीह (ترویحہ) से लिया गया है। तरावीह शब्द का meaning आराम और ठहरना। तरावीह की नमाज मर्द और औरतों पर फर्ज-ए-मौअक्कदा है।

हुजुर-ए-पाक (सल्ललाहो ताला अलैहेवसल्लम) बड़े पसन्द सेअदा करते थे। आप भी इस नमाज की फजिलत को समझे और इसे पढ़े।

तरावीह नमाज के बारे में जानने लायेक जरूरी बातें:

  • तरावीह की नमाज 20 रकाअत की होती है, और यह हदीशों में भी है।
  • ये नमाज इशा के फर्ज से तुलु-ए-फर्ज तक पढ़ी जा सकती है।
  • तरावीह की नमाज वित्र से पहले भी पढ़ी जा सकती है और बाद में भी।
  • तरावीह का नमाज पढ़ने के लिए आपको इशा का नमाज पढ़ना जरूरी है।
  • तरावीह की नमाज आप कजा नहीं पढ़ सकते।
  • तरावीह की नमाज में आप अगर दो रकआत पर सलाम फेरते हैं तो हर दो रकआत की अलग-अलग नीयत करें। वैसे आप 20 रकआत की एकसाथ भी नियत कर सकते हैं।
  • तरावीह की नमाज में एक बार कुरान मुकम्मलकरना सुन्नत-ए-मौअक्कदा है।
  • एक कुरान मुकम्मल होजाने के बाद भी तरावीह की नमाज आखिरी तक पढ़ते रहना सुन्नत-ए-मौअक्कदा है।
  • तरावीह की 20 रकआत नमाज में पाँच तरवीहा होते हैं। (चार रकआत एक तरवीहा)
  • जब भी चार रकआत के बाद बैठें तो उस वक्त खामोश रहें, कलमा पढ़ें या दरूद शरीफ पढ़ें।
  • चार रकआत तरावीह के बाद ये तसवीह पढ़ें।

  • ؕسُبۡحَانَ ذِی  الۡمُلۡکِ وَالۡمَلَکُوۡتِ
     سُبۡحَانَ ذِی الۡعِزَّۃِ وَالۡعَظَمَۃِ وَالۡھَیۡبَۃِ
    ؕ وَالۡقُدۡرَۃِ وَالۡکِبۡرِیَآءِ وَالۡجَبَرُوۡتِ
    ؕسُبۡحَانَ الۡمَلِکِ الۡحَیِّ الَّذِیۡ لَا یَنَامُ وَلَایَمُوۡتُ
    ؕ سُبُّوۡحٌ قُدُّوۡسٌ رَبُّنَا وَ رَبُّ الۡمَلٰٓئِکَۃِ وَرُّوۡحِ
    ؕاَللَّھُمَّ اَجِرۡنَا مِنَ النَّارِ  یَا مُجِیۡرُ یَا مُجِیۡرُ یَا مُجِیۡرُ
  • तरावीह में जमाअत के साथ नमाज पढ़ना सुन्नत-ए-किफ़ाया है, अगर मस्जिद के सब लोग छोड़ देंगे तो सब गुनाहगार होंगे और किसी एक ने घर में तन्हा पढ़ ली तो गुनाहगार नहीं। बिला वजह जमाअत छोड़ने की भी इजाज़त नहीं है।
  • तरावीह मस्जिद में जमाअत के साथ पढ़ना अफ़ज़ल है। आप अगर घर में पढ़े तो जमाअत के छोड़ने का गुनाह नहीं, पर मस्जिद में पढ़ने जैसा सवाब नहीं।
  • कुरान की सही तिलावत करने वाले को ही इमाम बनाये, इमाम बनने के लिए सिर्फ अच्छी आवाज का होना ही काफी नहीं।
  • अगर बालिग, बच्चे या नाबालिक के पीछे नमाज पढ़े तरावीह नहीं होगी।
  • एक शख़्स ईशा व वित्र की नमाज पढ़ाये और दूसरा शख़्स तरवीह, जायज है।
  • तरावीह की नमाज बैठ कर पढ़ना मकरूह है।
  • तरवीह की नमाज में कुरान शरीफ सुनना फर्ज है। इस दौरान बातें करना या और कुछ जायज नहीं।
  • नमाज के दौरान इमाम से तरावीह पढ़ने में कोई भूल हुई तो ठीक करकेही आगे पढ़े।
  • अगर नमाज के दौरान कोई गलती हुई, यानी तीन रकआत पढ़ कर सलाम फेरा अगर दूसरी पर बैठा नहीं था तो इनके बदले की दो रकआत फिर पढ़ले।
  • अगर किसी वजह से मुकम्मल न हो तो सूरतों की तरावीह पढ़ें।

तीनो आसरों की दुआ और उनकी फजीलत

30 दिन के रमजान को 10-10 दिन करके तीन आसरों में बाँटा गया है। 1) पहला आसरा (2) दूसरा आसरा (3) तीसरा आसरा। इन तीनों आसरो की अलग अलग महत्वता है।

First Ashra: (First 10  days of Ramadan) – Days of Mercy
Second Ashra: (Second 10 days) – Days of Forgiveness
Third Ashra: (Last 10 days) – Days to seek refuge from Hellfire

रमादान का पहला आसरा:

Ramadan का पहला आसरा 1-10 रोजे को माना गया है। पहला आसरा रहम का होता है। इस दौरान बन्दे अपने इबादत से अपने लिए अल्लाह से रहम की दुआ करते हैं, और अल्लाह अपने बन्दों की इबादत से खुश होकर उनपर रहम फरमाते हैं।

Ramadan Ke 1st Ashray Ki Dua:

Importance And Duas Of Three Stages Of Ramadan
1st Ashre ki dua

रमादान का दूसरा आसरा:

Ramadan का दूसरा आसरा 11-20 रोजे को माना गया है। दूसरा आसरा माफी का होता है। इस दौरान बन्दे अपने दुआ में अल्लाह से अपने गुनाहों से तौबा कर अपने लिए माफी मांगते हैं। अल्लाह अपने बन्दों की इबादत से खुश होकर उनके सारे गुनाहों को माफ कर देते हैं।

Ramadan Ke 2nd Ashray Ki Dua:

Importance And Duas Of Three Stages Of Ramadan
2nd Ashre ki Dua

रमादान का तीसरा आसरा:

Ramadan का तीसरा आसरा 21-30 रोजे को माना गया है। तीसरा आसरा की दुआ जहन्नम की आग से बचाने के लिए होता है। इस दौरान बन्दे बड़े सिद्दत से अपने इबादत के जरिए अपनी आखिरत तय करते हैं, और बार-बार अपने दुआ में जहन्नम की आग से बचने की दुआ मांगते हैं। और इन्साअल्लाह अल्लाह इसे भी मंजूर करता है।

Ramadan Ke 3rd Ashray Ki Dua:

Importance And Duas Of Three Stages Of Ramadan
3rd Ashre ki dua

उम्मीद करता हूँ की ये जानकारी आपके काम आये, अगर कोई भूल हुई तो माफ करदें। मेरी भूल को या इस पोस्ट के बारे में कुठ कहना हो तो Comment Box में जरूर बताएं। इस रमजान दुआ पढ़ते रहिए, दुआ करते रहिए। मुझे भी दुआ में शामिल किजिएगा।

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Zameer Hussain

मेरा नाम Zameer Hussain है, मैँ एक Part Time Blogger हूँ. Professionally मैं एक Graphic Designer हूँ। मेरी हमेशा से ये कोशिश रहती है कि अच्छा से अच्छा Wishing Image आपके लिये बना सकूँ।

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